Thursday, 26 September 2013

महाभारत की कुछ अनसुनी कहानियाँ |

महाभारत की कहानियाँ हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, फिर भी बहुत कुछ हे जो हम नहीं जानते। यहाँ पढ़िये महाभारत की कुछ अनसुनी और दिलज़स्प कहानियाँ...

(१) महाभारत मैं शकुनी की भूमिका
ध्रतराष्ट्र का विवाह गांधार देश की गांधारी के साथ हुआ था। गंधारी की कुंडली मैं दोष होने की वजह से एक साधु के कहे अनुसार उसका विवाह पहले एक बकरे के साथ किया गया था। बाद मैं उस बकरे की बलि दे दी गयी थी। यह बात गांधारी के विवाह के समय छुपाई गयी थी. जब ध्रतराष्ट्र को इस बात का पता चला तो उसने गांधार नरेश सुबाला और उसके 100 पुत्रों को कारावास मैं डाल दिया और काफी यातनाएं दी।



(२) महाभारत मैं शकुनी की भूमिका
एक एक करके सुबाला के सभी पुत्र मरने लगे। उन्हैं खाने के लिये सिर्फ मुट्ठी भर चावल दिये जाते थे। सुबाला ने अपने सबसे छोटे बेटे शकुनि को प्रतिशोध के लिये तैयार किया। सब लोग अपने हिस्से के चावल शकुनि को देते थे ताकि वह जीवित रह कर कौरवों का नाश कर सके। मृत्यु से पहले सुबाला ने ध्रतराष्ट्र से शकुनि को छोड़ने की बिनती की जो ध्रतराष्ट्र ने मान ली। सुबाला ने शकुनि को अपनी रीढ़ की हड्डी क पासे बनाने के लिये कहा, वही पासे कौरव वंश के नाश का कारण बने। शकुनि ने हस्तिनापुर मैं सबका विश्वास जीता और 100 कौरवों का अभिवावक बना। उसने ना केवल दुर्योधन को युधिष्ठिर के खिलाफ भडकाया बल्कि महाभारत के युध् का आधार भी बनाया।


(३) द्रौपदी का पिछला जन्म
द्रौपदी अपने पिछले जन्म मैं इन्द्र्सेना नाम की ऋषि पत्नी थी। उसके पति संत मौद्गल्य का देहांत जल्दी ही हो गया था। अपनी इच्छाओं की पूर्ति की लिये उसने भगवान शिव से प्रार्थना की। जब शिव उसके सामने प्रकट हुए तो वह घबरा गयी और उसने 5 बार अपने लिए वर मांगा। भगवान शिव ने अगले जन्म मैं उसे पांच पति दिये.



(४) धृतराष्ट्र का पिछला जन्म
धृतराष्ट्र अपने पिछले जन्म मैं एक बहुत दुष्ट राजा था। एक दिन उसने देखा की नदी मैं एक हंस अपने बच्चों के साथ आराम से विचरण कर रहा हे। उसने आदेश दिया की उस हंस की आँख फोड़ दी जायैं और उसके बच्चों को मार दिया जाये। इसी वजह से अगले जन्म मैं वह अंधा पैदा हुआ और उसके पुत्र भी उसी तरह मृत्यु को प्राप्त हुये जैसे उस हंस के।





(५) कृष्णा का रथ
महाभारत के युध् के समय कृष्णा अर्जुन के सारथी थे। वह जिस रथ को चलाते थे, वह अपने आप मैं बहुत शक्तिशाली था। युध् के बाद उन्होने पहले अर्जुन को रथ से उतरने को कहा उसके बाद वह उतरे। कृष्णा के रथ से उतरते ही रथ एक ज़ोरदार धमाके के साथ ध्‍वस्‍त हो गया।





(६) सहदेव एक ज्योतिषी थे
सहदेव भविष्य मैं होने वाली हर घटना को पहले से ही जानता था। वह जानता था की महाभारत होने वाली हे पर उसे कृष्णा ने श्राप दिया था की अगर वह इस बारे मैं लोगों को बतायेगा तो उसकी मृत्य हो जाएगी।






(७) अभिमन्यु कौन था?
कहा जाता हे की अभिमन्यु एक कालयवन नामक राक्षस की आत्मा थी। कृष्ण ने कालयवन का वध कर, उसकी आत्मा को अपने अंगवस्त्र मैं बांध लिया था। वह उस वस्त्र को अपने साथ दावर्का ले गये और एक अलमारी मैं रख दिया। सुभद्रा (अर्जुन की पत्नी) ने गलती से जब वह अलमारी खोली तो एक ज्योति उसके गर्भ मैं आगयी और वह बेहोश हो गयी। इसी वजह से अभिमन्यु को चक्रव्यूह भेदने का सिर्फ आधा ही तरीका बताया गया था।



(८) एकलव्य की कहानी
एकलव्य देवाश्रवा का पुत्र था। वह जंगल मैं खो गया था और उसको एक निषद हिरण्यधनु ने बचाया था। एकलव्य रुक्मणी स्वंयवर के समय अपने पिता की जान बचाते हुए मारा गया. उसके इस बलिदान से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उसे वरदान दिया की वह अगले जन्म मैं द्रोणाचर्य से बदला ले पायेगा। अपने अगले जन्म मैं एकलव्य द्रष्टद्युम्न बनके पैदा हुआ और द्रोण की मृत्यु का कारण बना।






(९) भीम का पुत्र
भीम का एक पुत्र महाभारत के युध् के बाद भी जीवित रहा, उसका नाम सर्वागा था और उसकी माता का नाम बलानधारा। परिक्षित से बहुत बड़ा होने के बाद भी उसे राज्य नहीं मिला और अन्ततः उसे काशी जाकर राज करना पड़ा। काशी उसकी माता का राज्य था।






(१०) सर्प यज्ञ
काफी सारी छोटी छोटी कहानियाँ महाभारत का हिस्सा हैं; अमृत मंथन भी उन्ही मैं से एक हे। पर बहुत कम लोग जानते हैं की महाभारता की पूरी कहानी जन्माजय के द्वारा करवाये गये सर्प यज्ञ के समय सुनाई गयी थी। जन्माजय परीक्षित का पुत्र था।





(११) पांचवा वेद
महाभारत ग्रंथ को पंचम वेद के नाम से भी जाना जाता हे। महाभारत की कहानी शुरू करने से पहले और खत्म करने से पहले 'शांती परवम' का पाठ करना अनिवार्य हे।






(१२) द्रौपदी और सत्यभामा
महाभारत हर तरह के ज्ञान का स्रोत्र हे। वाना परवम मैं द्रौपदी सत्यभामा को पत्नी धर्म के गुर सिखलाती हे. वह विस्तार से पत्नी के कर्तव्यओं का विवरण देती हे।







(१३) द्रौपदी ने चीर-हरण के बाद क्षमा मांगी
जब युधिष्ठिर जुए मैं द्रौपदी को हार गया तब दुशासन ने द्रौपदी के वस्त्र हरण का प्रयास किया. इस पूरे प्रकण के बाद द्रौपदी ने दरबार मैं बैठे सभी बड़े लोगों से क्षमा याचना की। उसने कहा, "मुझे दरबार मैं घसीट के लाया गया और बेइज़्ज़त किया गया। इस सबके होते मैं अपने बड़ों को प्रणाम नहीं कर पायी। इस के लिये मैं क्षमा मांगती हूँ"



(१४) कृष्ण और दुर्योधन
कृष्ण ने दुर्योधन को समझाने के भाव से गीता का उपदेश देने की कोशिश की थी। दुर्योधन ने कृष्ण को रोकते हुए कहा की उसे सही और गलत का पूरा ज्ञान हे पर उसका अपने आप पर वश नहीं हे। उसका कहना था की उसके अंदर कोई दिव्यशक्ति हे जो उसे सही पथ पे नहीं चलने दे रही।






(१५) पाण्डु की अंतिम इच्छा
पाण्डु ज्ञानी थे. उनकी अंतिम इच्छा थी की उनके पांचो बेटे उनके म्रत शरीर को खायैं ताकि उन्होने जो ज्ञान अर्जित किया वो उनके पुत्रो मैं चला जाये। सिर्फ सहदेव ने पिता की इच्छा का पालन करते हुए उनके मस्तिष्क के तीन हिस्से खाये। पहले टुकड़े को खाते ही सहदेव को इतिहास का ज्ञान हुआ, दूसरे टुकड़े को खाने पे वर्तमान का और तीसरे टुकड़े को खाते ही भविष्य का.


(१६) क्या महाभारत सिर्फ एक पुराण हे?
कुरुक्षेत्र मैं एक जगह हे, जहां माना जाता हे की महाभारत का युध् हुआ था। उस जगह कुछ 30 किलोमीटर के डायरे मैं मिट्टी संरचना बहुत अलग हे। वेज्ञानिक समझ नहीं पा रहे की यह कैसे संभव हे क्यूंकि इस तरह की मिट्टी सिर्फ तब हो सकती हे अगर उस जगह पे बहुत ज़्यादा तेज़ गर्मी हो। बहुत से लोगों का मानना हे की लड़ाई की वजह से ही मिट्टी की प्रवर्ती बदली हे।



(१७) बर्बरीक और कृष्ण
बर्बरीक भीम का प्राक्रमी पोता और कृष्ण का शिष्य था. बर्बरीक को कोई नहीं हरा सकता था। उसके पास कामाख्या देवी से प्राप्त हुए तीन तीर थे, जिनसे वह कोई भी युध् जीत सकता था। पर उसने शपथ ली थी की वह सिर्फ कमज़ोर पक्ष के लिये ही लड़ेगा। महाभारत के युध् के समय यह एक दुविधा बन गयी थी क्यूंकि अगर बर्बरीक पांडवों की तरफ से लडा तो युध् के पहले दिन ही कौरव कमज़ोर हो जाएंगे और फिर बर्बरीक को उनकी तरफ से लड़ना होगा। इस प्रकार पांडवों की हार निश्चित थी। इस दुविधा से बाहर आने के लिये और पांडवों को हार से बचने के लिये कृष्णा ने गुरु दक्षिणा मैं बर्बरीक का सर मांग लिया।


(१८) दुर्योधन पुत्र
दुर्योधन की पुत्र के बारे मैं ज़्यादा नहीं लिखा गया। दुर्योधन का एक पुत्र था जिसका नाम था लक्षमन.







(१९) योधाओं के शंख
सभी योधाओं के शंख बहुत शक्तिशाली होते थे। भागवत गीता के एक श्लोक मैं सभी शंखों के नाम हैं। अर्जुन के शंख का नाम देवदत्त था। भीम के शंख का नाम पौंड्रा था, उसकी आवाज़ से कान से सुनना बंद हो जाता था। कृष्णा के शंख का नाम पांचजन्य, युधिष्ठिर के शंख का नाम अनंतविजया, सहदेव के शंख का नाम पुष्पकौ और नकुल के शंख का नाम सुघोशमनी था।



(२०) अर्जुन की पत्नियाँ
एक बार कुछ डाकुओं का पीछा करते हुए अर्जुन गलती से युधिष्ठिर और द्रौपदी के कमरे मैं दाखिल हो गया। अपनी गलती की सज़ा के लिये वह 12 साल के वनवास के लिये निकल गया। उस दौरान अर्जुन ने तीन विवाह किये - चित्रांगदा (मणिपुरा), उलूपी (नागा) और सुभद्रा (कृष्ण की बहन)

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